स्थायी समाधान की जरूरत

हाल ही में सरकार ने एक पहल शुरू की है कि IAS के उच्च स्तरीय कुछ पदों पर निजी क्षेत्र से नियुक्ति की जायेगी। सरकार का कहना है कि निजी क्षेत्र के विशेषज्ञ सार्वजनिक  क्षेत्र मे अपने अनुभवो का प्रयोग कर शासन प्रणाली को सुचारू रूप से आगे बढ़ा सकते है।

        एक महत्वपूर्ण प्रश्न यह उठता है कि सरकार द्वारा IAS के उच्चस्तरीय पदों पर निजी क्षेत्र से नियुक्ति लाभदायक भी है या नहीं। जरा विचार करो अगर किसी अस्पताल में किसी हाकिम को ईलाज करने के लिए और न्यायालय में किसी काजी या किसी पुजारी को न्याय करने के लिए  यह बोलकर बैठा दिया जाए कि सरकार अब अन्य विशेषज्ञों को भी अपनी प्रतिभा दिखाने का मौका देगी, तो यह मरीज और अपराधी के जीवन के साथ खिलवाड़ नही तो क्या है?

     क्या सरकारी अधिकारियों में प्रतिभा की कमी पायी जाती जो उनकी जगह निजी क्षेत्र के विशेषज्ञ स्थान लेंगे? निजी क्षेत्र का विशेषज्ञ सार्वजनिक क्षेत्र की समस्याओं को कैसे समझ पायेगा, यह विचारणीय है।

   इस समस्या का समाधान यह हो सकता है कि IAS जिस शैक्षणिक पृष्ठभूमि का पढ़ा हुआ है उसको उसी तरह के विभाग की जिम्मेदारी दी जाए।जैसे अगर कोई मेडिकल बैकग्राउंड से है तो उसको स्वास्थ्य विभाग मिलना चाहिए। साथ ही समय-समय पर आवश्यक प्रशिक्षण भी देते रहना चाहिए ताकि अधिकारी आधुनिकता के साथ कदम मिला सके। 

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