गबन


ग़बन की कहानी जालपा और रमानाथ से जुड़ी है। इस कहानी में एक सुंदर, सुख चाहने वाला, घमंडी, लेकिन एक नैतिक रूप से कमजोर व्यक्ति, जो अपनी पत्नी जालपा को उसके गहने उपहार में देकर खुश करने की कोशिश करता है, जिसे वह वास्तव में अपने अल्प वेतन के साथ खरीदने का जोखिम नहीं उठा सकता है। कर्ज का एक जाल, जो अंततः उसे गबन करने के लिए मजबूर करता है।

उसकी सबसे बड़ी कमजोरी ही यह है कि वह अपने मन की बात निकट से निकट व्यक्ति को भी नहीं बताता। उसकी सारी समस्याओं की जड़ यही है।

गबन एक साथ कई तत्कालीन विषयों पर बहस करता है।जैसे कि मध्यवर्गीय प्रदर्शनप्रियता, स्त्रियों की आभूषणप्रियता, पुरुषों की अहं प्रवृत्ति, व्यक्ति का दुर्बल चरित्र , बेमेल विवाह, सम्मिलित परिवार में विधवा को संपत्ति का अधिकार ना होना, जाति व्यवस्था, स्वराज के लिए अपने पुत्रों को भी बलिदान कर देने की जिंदादिली, विदेशी वस्त्रों का बहिष्कार और स्वदेशी वस्तुओं का प्रयोग, सरकारी गवाह के प्रति तत्कालीन समाज का नजरिया, पुलिस प्रशासन का भ्रष्ट रूप, वेश्याओं की समाज में स्थिति।

मुझे लगता है कि इस उपन्यास का नाम गबन नही बल्कि जालपा होना चाहिए था। इस उपन्यास के पूर्वार्द्ध को पढ़कर गबन नाम सही लगता है लेकिन पूरा उपन्यास पढ़ने के बाद यह नाम फिट नहीं बैठता है क्योंकि इसमें सिर्फ गबन की ही कहानी नही है।

जालपा का चरित्र उपन्यास के सभी पात्रों से श्रेष्ठ है। वह एक देशभक्त नारी है। देश के खिलाफ जाने वालों से वह घृणा करती है। आभूषण-प्रियता उसके चरित्र में पायी जाती है लेकिन जब परिस्थितियाँ बदल जाती है तो वह भी अपनी कमजोरियों को दूर करने की कोशिश करती है। वस्तुतः जालपा का स्वाभाविक श्रृंगार-प्रेम, परंपरागत रीति -रीवाजों को तोड़कर स्वतंत्र चिंतन की क्षमता, विशाल हृदयता, देशभक्ति व मानव-प्रेम की भावना, त्याग करने की अपार शक्ति उसे भारतीय नारी के नए रूप का प्रतीक बना देते हैं।

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