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प्लूटो (यमराज का घर)

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★ 2006 से पहले इसे सौरमंडल के सभी ग्रहों में से सबसे छोटा ग्रह होने का दर्जा प्राप्त था, लेकिन 2006 के बाद इसे इस सूची से हटा दिया गया और इसे बौने ग्रहों की सूची में डाल दिया गया। प्लूटो ग्रह को 'यम ग्रह या गृह' भी कहा जाता है। ★ प्लूटो ग्रह का नाम ऑक्सफॉर्ड स्कूल ऑफ लंदन में पढ़ने वाली एक 11वीं कक्षा की छात्रा वेनेशिया बर्ने ने रखा था। इस बच्ची का कहना था कि रोम में अंधेरे के देवता को प्लूटो कहा जाता है और इस ग्रह पर भी लगभग हमेशा अंधेरा ही रहता है, इसलिए इसका नाम प्लूटो रखा जाए। इस बच्ची को उस समय इनाम के तौर पांच पाउंड दिए गए थे, जो आज के हिसाब से करीब 472 रुपये होते हैं।   ★ प्लूटो को सूर्य का एक चक्कर लगाने में 248 साल लग जाते हैं। यहां एक दिन पृथ्वी के मुकाबले 6.4 दिन का होता है यानी इस ग्रह का 24 घंटा लगभग 153 घंटे के बराबर होता है।   ★ वैज्ञानिकों के मुताबिक, प्लूटो ग्रह पर बर्फ के रूप में मौजूद है और इस पानी की मात्रा पृथ्वी के सभी महासागरों में आरक्षित पानी से लगभग तीन गुना अधिक है। इसके अलावा कहा जाता है कि इसकी सतह पर बड़े-बड़े गड्ढे भी हैं।  ★ प्लूटो...

दिल्ली दंगो का जिम्मेदार कौन?

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दिल्ली में पिछले 3 दिनों से चल रहे दंगो में अब तक 21 लोगो की मौत हो चुकी है और करीब 189 लोग घायल हैं। दंगे हों और दुकान, घर, वाहन व पूजा स्थल में आगजनी न हो तो दंगे फ़ीके लगते है। इसलिए ये भी जल रहे हैं। दंगो का दोषारोपण दोनों पक्ष एक - दूसरे पर कर रहे हैं। कोई पुलिस की अकर्मण्यता को दोषी ठहरा रहा है तो कोई सरकार की अकर्मण्यता को। हम यहीं जानने का प्रयास करेंगे कि इन दंगो का दोषी कौन है। CAA व NRC का विरोध करने वाले करीब ढाई महीने से शाहीन बाग में प्रोटेस्ट कर रहे हैं। प्रोटेस्ट करना इनका मूल अधिकार है। लेकिन उन आम लोगो को भी शांतिपूर्ण जीवन जीने का मूल अधिकार है जिनको इनकी वजह से परेशानियों का सामना करना पड़ रहा है। इनके प्रोटेस्ट के चलते ROAD BLOCK से लाखो लोगों को रोजाना परेशानी का सामना करना पड़ रहा है। यहीं काम जब इन्होंने जाफराबाद में करने का प्रयास किया तो लोगो का गुस्सा फूट पड़ा। शरजील इमाम और वारिस पठान जैसे लोगो ने भी इस गुस्से को बढ़ाने में मदद ही की।  हिन्दू-मुस्लिम, हिंदुस्तान व पाकिस्तान, शाहीन बाग, देशभक्ति, आतंकवादी, जय श्री राम, जय बजरंग बली। ये ऐसे शब्द है जो...

सुर्खियों में क्यों रहते हैं बेतुके बयान?

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शायद पिछले कुछ सालों से बेहूदा बयान देने का प्रचलन बढ़ता हुआ दिखायी दे रहा है। ऐसे बयान देने वालों में नेता व धर्मगुरु सबसे आगे हैं। आए दिन कोई न कोई बेहूदा बयान देता ही रहता है। अग़र ऐसे Insane Statements की लिस्ट बनायी जाएं तो शायद फ़िर भी मैं सबको बयाँ नही कर पाऊँ।   अहमदाबाद में, 18 फरवरी (भाषा) गुजरात के एक धार्मिक नेता ने कहा है कि मासिक धर्म के समय पतियों के लिए भोजन पकाने वाली महिलाएं अगले जीवन में ‘कुतिया’ के रूप में जन्म लेंगी, जबकि उनके हाथ का बना भोजन खाने वाले पुरुष बैल के रूप में पैदा होंगे। स्वामीनारायण मंदिर से जुड़े स्वामी कृष्णस्वरूप दासजी ने कथित तौर पर यह टिप्पणी की है। यह स्वामीनारायण मंदिर भुज स्थित श्री सहजानंद गर्ल्स इंस्टिट्यूट (एसएसजीआई) नाम के उस कॉलेज को चलाता है जिसकी प्रधानाचार्य और अन्य महिला स्टाफ ने यह देखने के लिए 60 से अधिक लड़कियों को कथित तौर पर अंत:वस्त्र उतारने को विवश किया कि कहीं उन्हें माहवारी तो नहीं हो रही। ऐसा इसलिए किया गया क्योंकि लड़कियों ने कथित तौर पर हॉस्टल का वह नियम तोड़ा था जिसमें मासिक धर्म के समय लड़कियों के अन...

''बुरी नहीं है वेश्यावृति, अगर जबरन नहीं है तो''

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कल मैं सआदत हसन मंटो के बारे में एक किताब पढ़ रहा था। जिसमे उनके लेख व कुछ कहानियां थी। इसी क़िताब में उनके 'इस्मतफरोशी' नामक लेख ने मेरे दिमाग को झकझोरने वाला काम किया। वेश्यावृत्ति के प्रति इस लेख ने मुझे फिर से सोचने के लिए मजबूर कर दिया। जिस तरह से ओशो की किताब ‛संभोग से समाधि की ओर’ ने सेक्स के प्रति मेरी मानसिकता पर मुझे सवाल उठाने के लिए मजबूर कर दिया था, ठीक ऐसे ही इस लेख ने यह काम ‛वेश्यावृत्ति’ को लेकर किया। मेरी सलाह है कि जब भी आपको समय मिले तो कम से कम एक बार इस लेख को अवश्य पढ़ें। मेरी तरह बहुत से लोग यही मानते होंगे कि वेश्यावृत्ति समाज के ऊपर एक काला धब्बा है जो छुटाए नही छूटता। वेश्याओं व वेश्यावृत्ति पर हम बात ही नहीं करना चाहते हैं। ऐसे बर्ताव करते हैं जैसे इनका कोई वजूद ही नही हैं। लेकिन वजूद तो है भाई। हमेशा से रहा है और हमेशा रहेगा। हमारे बात न करने से यह मुद्दा दब नही जायेगा। मंटो ने अपनी ज्यादतर कहानियों में वेश्याओं के बारे में लिखा। उस सच्चाई को दर्शाया जिस पर हम बात करने से मुह फेर लेते है। जिसको हम बुरा मानते हैं। यहीं कारण है कि समाज की इस का...

अंग्रेज़ी सीखने के क्रम में गलतियों का मज़ाक उड़ाने के बजाय मदद करिए

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अमेरिका के बाद अंग्रेजी बोलने वालों के सँख्याबल के अनुसार भारत का दूसरा स्थान है। भारत की जनसंख्या का 10% आबादी अंग्रेजी बोलती है। भारत की आबादी का बहुत सा हिस्सा ऐसा है जो अंग्रेजी जानते हुए भी नही जानता है। मतलब यह है कि इनके लिए आप यह नही कह सकते कि इनको अंग्रेजी नही आती है और न ही यह कह सकते है कि इनको अंग्रेजी आती है। इनको थोड़ी- बहुत अंग्रेजी आती है लेकिन इतनी अच्छी नही आती है कि ये अंग्रेजी को फर्राटेदार बोल सकें या किसी अंग्रेजी अखबार का कोई लेख पढ़ सकें। ये लोग किसी से यह भी नही कह सकते कि हमको अंग्रेजी नही आती है और न ही यह कह सकते हैं कि इनको अंग्रेजी आती है। यह संकटमय स्थिति जीवनभर इनके साथ रहती है।        सोशल मीडिया पर मैंने देखा है कि यही वर्ग अपनी टूटी-फूटी अंग्रेजी बोलकर अपने आप को अंग्रेजी का जानकार घोषित करने का प्रयास करता है। मुझे समस्या इस बात से नही है कि ये लोग टूटी-फूटी अंग्रेजी बोलते हैं, क्योंकि अंग्रेजी सीखते समय गलतियां होना लाजमी है। कोई भी एकदम से किसी भी क्षेत्र में धुरंधर नही बनता है। अतः गलती करने में कोई शर्म नही है। मुझे समस्या ...