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हिंदी के रखवाले ही इसके विनाशक

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हिंदी की जो वर्तमान हालत है उसके बंटाधार खुद उसके लेखक (खुद को हिंदी के रखवाले कहने वाले) ही हैं। और फिर बोलते हैं कि “आजकल कोई हिंदी को नही पढ़ता है, इस वजह से हमारी किताबें  नही बिकती हैं, वरना हम तो बहुत अच्छा लिखते हैं।” उनका यह अच्छा लेखन ही उनकी इस हालत का जिम्मेदार है। ये लोग कुछ ज्यादा ही अच्छा लिख देते हैं। इतना कि पढ़ने वाले को ही समझ न आए कि वो पढ़ क्या रहा है। उसे लगता है कि वह शायद हिंदी नही किसी अन्य भाषा को पढ़ रहा है। अरे भाई! लिखने का उद्देश्य ही यह होता है न कि सामने वाले को तुम्हारा लिखा समझ आये! अगर उसको समझ ही नही आ रहा है तो तुम्हारे लिखने का क्या फायदा हुआ।  एक महाशय ने कविताएं लिखना शुरू किया। उसमें ऐसे-ऐसे भारी-भरकम शब्द कि बंदा पढ़ते ही बेहोश हो जाए। मुझे वैसे भी कोई कविता जल्दी समझ नही आती है अब उस नए-नए बने कवि को समझने के लिए मुझे तो कई जन्म लेने पड़ेंगें। हम तो यही विनती कर सकते हैं कि भाई थोड़ा सरल लिख लो ताकि मुझ जैसे मंदबुद्धि को भी कुछ समझ आ जाए।  अग़र कोई सरल हिंदी में लिख दे तो बोलेंगें कि इस लेखक को हिंदी साहित्य के बारे में क्या पता, नए-नए लौ...

असनातनी सम्प्रदाय

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600ई.पूर्व में पुरोहितवाद और ब्राहणों द्वारा स्थापित चतुःवर्णीय व्यवस्था के खिलाफ घोर प्रतिक्रिया हुई और उतरी भारत में कई असनातनी सम्प्रदाय उठ खड़े हुए।   1.मक्खलिपुत्त गोशाल  2.पुरन काश्यप  3.अजित केशकम्बलिन  4.पाकुध कच्चायन  5.संजय वेल्लठपुत्त  मक्खलि गोशाल :- गोशाल महावीर के मित्र और शिष्य थे।इन्होंने आजीवक सम्प्रदाय की स्थापना की थी।इनकी शिक्षा का मूल आधार अक्रियावाद या नियतिवाद था। इनका पुनर्जन्म में विश्वास था। ये भाग्यवादी भी थे। गोशाल का मत था कि संसार की प्रत्येक वस्तु भाग्य द्वारा पूर्व नियंत्रित और संचालित होती है। मनुष्य के जीवन पर उनके कर्मों का कोई प्रभाव नहीं पड़ता है। पूरन कश्यप :- पुरन काश्यप अक्रियावादी थे। ये बुद्ध के समकालीन थे।इन्होंने नश्वरतावादी सिद्धांत का खण्डन किया। सांख्य दर्शन के विकास में इनके मत का काफी योगदान रहा। इनका विचार था कि चोरी, डकैती, हत्या, झूठ आदि पाप नहीं है और दान, जप, तप, सत्य से किसी प्रकार का पुण्य नहीं होता अर्थात् कर्मों का कोई फल नहीं होता। अजीत केशकम्बलिन :- अजीत केशकम्बलिन पूर्णतः भौतिकवादी और उच्छेदव...

प्लूटो (यमराज का घर)

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★ 2006 से पहले इसे सौरमंडल के सभी ग्रहों में से सबसे छोटा ग्रह होने का दर्जा प्राप्त था, लेकिन 2006 के बाद इसे इस सूची से हटा दिया गया और इसे बौने ग्रहों की सूची में डाल दिया गया। प्लूटो ग्रह को 'यम ग्रह या गृह' भी कहा जाता है। ★ प्लूटो ग्रह का नाम ऑक्सफॉर्ड स्कूल ऑफ लंदन में पढ़ने वाली एक 11वीं कक्षा की छात्रा वेनेशिया बर्ने ने रखा था। इस बच्ची का कहना था कि रोम में अंधेरे के देवता को प्लूटो कहा जाता है और इस ग्रह पर भी लगभग हमेशा अंधेरा ही रहता है, इसलिए इसका नाम प्लूटो रखा जाए। इस बच्ची को उस समय इनाम के तौर पांच पाउंड दिए गए थे, जो आज के हिसाब से करीब 472 रुपये होते हैं।   ★ प्लूटो को सूर्य का एक चक्कर लगाने में 248 साल लग जाते हैं। यहां एक दिन पृथ्वी के मुकाबले 6.4 दिन का होता है यानी इस ग्रह का 24 घंटा लगभग 153 घंटे के बराबर होता है।   ★ वैज्ञानिकों के मुताबिक, प्लूटो ग्रह पर बर्फ के रूप में मौजूद है और इस पानी की मात्रा पृथ्वी के सभी महासागरों में आरक्षित पानी से लगभग तीन गुना अधिक है। इसके अलावा कहा जाता है कि इसकी सतह पर बड़े-बड़े गड्ढे भी हैं।  ★ प्लूटो...

दिल्ली दंगो का जिम्मेदार कौन?

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दिल्ली में पिछले 3 दिनों से चल रहे दंगो में अब तक 21 लोगो की मौत हो चुकी है और करीब 189 लोग घायल हैं। दंगे हों और दुकान, घर, वाहन व पूजा स्थल में आगजनी न हो तो दंगे फ़ीके लगते है। इसलिए ये भी जल रहे हैं। दंगो का दोषारोपण दोनों पक्ष एक - दूसरे पर कर रहे हैं। कोई पुलिस की अकर्मण्यता को दोषी ठहरा रहा है तो कोई सरकार की अकर्मण्यता को। हम यहीं जानने का प्रयास करेंगे कि इन दंगो का दोषी कौन है। CAA व NRC का विरोध करने वाले करीब ढाई महीने से शाहीन बाग में प्रोटेस्ट कर रहे हैं। प्रोटेस्ट करना इनका मूल अधिकार है। लेकिन उन आम लोगो को भी शांतिपूर्ण जीवन जीने का मूल अधिकार है जिनको इनकी वजह से परेशानियों का सामना करना पड़ रहा है। इनके प्रोटेस्ट के चलते ROAD BLOCK से लाखो लोगों को रोजाना परेशानी का सामना करना पड़ रहा है। यहीं काम जब इन्होंने जाफराबाद में करने का प्रयास किया तो लोगो का गुस्सा फूट पड़ा। शरजील इमाम और वारिस पठान जैसे लोगो ने भी इस गुस्से को बढ़ाने में मदद ही की।  हिन्दू-मुस्लिम, हिंदुस्तान व पाकिस्तान, शाहीन बाग, देशभक्ति, आतंकवादी, जय श्री राम, जय बजरंग बली। ये ऐसे शब्द है जो...

सुर्खियों में क्यों रहते हैं बेतुके बयान?

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शायद पिछले कुछ सालों से बेहूदा बयान देने का प्रचलन बढ़ता हुआ दिखायी दे रहा है। ऐसे बयान देने वालों में नेता व धर्मगुरु सबसे आगे हैं। आए दिन कोई न कोई बेहूदा बयान देता ही रहता है। अग़र ऐसे Insane Statements की लिस्ट बनायी जाएं तो शायद फ़िर भी मैं सबको बयाँ नही कर पाऊँ।   अहमदाबाद में, 18 फरवरी (भाषा) गुजरात के एक धार्मिक नेता ने कहा है कि मासिक धर्म के समय पतियों के लिए भोजन पकाने वाली महिलाएं अगले जीवन में ‘कुतिया’ के रूप में जन्म लेंगी, जबकि उनके हाथ का बना भोजन खाने वाले पुरुष बैल के रूप में पैदा होंगे। स्वामीनारायण मंदिर से जुड़े स्वामी कृष्णस्वरूप दासजी ने कथित तौर पर यह टिप्पणी की है। यह स्वामीनारायण मंदिर भुज स्थित श्री सहजानंद गर्ल्स इंस्टिट्यूट (एसएसजीआई) नाम के उस कॉलेज को चलाता है जिसकी प्रधानाचार्य और अन्य महिला स्टाफ ने यह देखने के लिए 60 से अधिक लड़कियों को कथित तौर पर अंत:वस्त्र उतारने को विवश किया कि कहीं उन्हें माहवारी तो नहीं हो रही। ऐसा इसलिए किया गया क्योंकि लड़कियों ने कथित तौर पर हॉस्टल का वह नियम तोड़ा था जिसमें मासिक धर्म के समय लड़कियों के अन...