Posts

मैंने नास्तिकता की चादर क्यों ओढ़ ली?

Image
आज से तीन साल पहले शायद ही मेरे गाँव में मुझसे बड़ा कोई आस्तिक रहा होगा। उस समय मेरी नजरों में वह हर व्यक्ति पाप का हकदार था जो भी ईश्वर के अस्तित्व को नकारता था। मेरी पारिवारिक पृष्ठभूमि ग्रामीण क्षेत्र से जुड़ी हुई है और मेरे परिजन अशिक्षित है जो धर्म के प्रति उनके अंदर पैदा हुए आकर्षण को बढाने के लिए एक जिम्मेदार कारक कहा जा सकता है और जिसका प्रभाव बाद में मुझ पर भी पड़ा। पहले मेरे पिता भी एक नास्तिक ही थे लेकिन धीरे-धीरे उनकी जिंदगी में आयी समस्याओं ने उनको धर्म के प्रति इतना आकर्षित कर दिया कि आज वे भगवान कृष्ण के भक्त हैं और लोगों की समस्याओं को सुलझाने में व्यस्त रहते हैं। आज हमारे घर में ही एक बड़ा सा मंदिर है, जिसमें प्रतिदिन सुबह-शाम पूजा करने के लिए लगभग 1 घण्टा सुबह व 1 घण्टा शाम को लगता है। इसी मंदिर में, मैंने तीन साल पहले तक भगवान की आराधना की है। कहने का सार यह है कि अब भी मेरे घर में मुझे छोड़कर सब ईश्वर के प्रति गहन श्रद्धा रखते हैं।              तीन साल पहले मैं आगे की पढ़ाई के लिए दिल्ली आया जोकि अभी तक जारी ही है। जब मैं दिल्ली आया...

गणित का महत्व

Image
          विश्व प्रसिद्ध दार्शनिक प्लेटो ने अपनी अकादमी के दरवाजे पर लिखा हुआ था कि " गणित के ज्ञान से शून्य व्यक्ति इसमें प्रवेश न करें"।  अब आप सोच रहे होंगे कि एक दार्शनिक अपने विद्यार्थियों से गणित के ज्ञान की अपेक्षा क्यों कर रहा था। इसके दो कारण हो सकते है; पहला यह कि उस समय गणित, खगोलशास्त्र, व दर्शन अलग-अलग विषय न होकर एक ही विषय थे और दूसरा यह कि गणित ही एक ऐसा विषय है जो मस्तिष्क की कसरत करता है।           अगर आपको मस्तिष्क की तर्कशक्ति व  स्मरणशक्ति को बढ़ाना है तो गणित इसमें सहायक हो सकता है। इतिहास ऐसे महान लोगों से भरा हुआ है जो अपने किसी विषय क्षेत्र में विशेषज्ञता हासिल किए हुए थे लेकिन गणित में भी रुचि रखते थे। जैसे- नेपोलियन एक महान सेनापति था लेकिन वह भोजन के बाद प्रतिदिन विद्वानों के साथ बैठकर गणित पर चर्चा किया करता था। आर्किमिडीज की मृत्यु तो गणित प्रेम के कारण ही हुई थी,क्योंकि उनकी किसी बात से नाराज होने कारण रोम के राजा ने अपने सिपाहियों को आर्किमिडीज को बुलाने भेजा लेकिन उस समय आर्किमिडीज कोई गण...

मेरी राजनीतिक विचारधारा तटस्थ क्यों?

Image
प्रायः प्रत्येक व्यक्ति अपनी एक राजनीतिक विचारधारा रखता है और उसी के अनुसार राजनीतिक दशाओं की व्याख्या करता है। प्रायः यह समझा भी जाता है कि लोकतंत्र में प्रत्येक व्यक्ति को राजनीतिक रूप से जागरूक रहना चाहिए क्योंकि लोकतंत्र में सत्ता लोगों के बीच से ही निकालकर आती है। अतः अगर लोग राजनीतिक रूप से जागरूक नही रहेंगे तो सत्ता का गलत हाथों में जाने का भी डर रहता है जोकि समाज व देश के लिए सही नही है।  लेकिन होता क्या है हम राजनीतिक रूप से जागरूक तो हो जाते है लेकिन इस जागरूकता का आधार ग़लत बना लेते हैं।क्योंकि प्रायः देखा गया है कि लोगों की राजनीतिक दृष्टि निष्पक्ष न होकर किसी एक पार्टी के पक्ष में झुकी हुई होती है। मानकर चलिए कि मैं किसी 'A' नामक पार्टी को सपोर्ट करता हूं तो यह पार्टी जो भी नीति अपनाएगी चाहे वह गलत हो या सही मैं इसके हमेशा समर्थन में रहूंगा और अन्य पार्टियों की नीतियों का विरोध करूंगा। यही आधार प्रत्येक व्यक्ति अपनाए हुए है। उनके सोशल अकाउंट्स  उनकी राजनीतिक विचारधारा का बखूबी बखान कर रहे हैं।   मेरा राजनीतिक दृष्टिकोण कुछ लोगों को अखरता है क्योंकि ...

असली सफलता का पैमाना दूसरे से तुलना नहीं बल्कि आत्मसंतुष्टि होनी चाहिए

Image
सामान्यतः अपने आप को विकास के चरम बिंदु पर ले जाने के लिए हम तुलना शब्द का प्रयोग करते हैं। तुलना करके हम जान पाते है कि हमसे कहां गलतियां हुईं और कहाँ हमने सर्वश्रेष्ठ प्रदर्शन किया। मेरे अनुसार अगर हमें अपनी तुलना अपने आप से करनी हो तो तुलना करना एक सर्वश्रेष्ठ कदम है लेकिन बात जब अपनी तुलना दुसरों से करने की आती है तो तुलना की परिभाषा मेरे अनुसार अपना अर्थ खोने लगती है। प्रायः ज्यातर लोगों से अपने अभिभावकों से यह जरूर सुना होगा कि अमुक के लड़के को देखों...वह कहाँ से कहाँ पहुंच गया और तुम यहीं पड़े रहना। अच्छी शिक्षा, अच्छी नौकरी और एक अच्छा पारिवारिक जीवन यही सब सफलता के पैमाने बने हुए हैं। अगर कोई व्यक्ति अशिक्षित है या प्रतिष्ठित जॉब नही रखता या पारिवारिक जीवन सुखी नहीं है तो वह लोगों की नजरों में एक असफल इंसान घोषित हो जाता है जोकि सही पैमाना नहीं है। यह जरूरी नही कि प्रत्येक व्यक्ति शिक्षा में ही रूचि दिखाए।एक खिलाड़ी कम शिक्षित हो सकता है, एक शिक्षित व्यक्ति को खेल में अरुचि हो सकती है, एक पेशेवर इंसान अपने पेशे में सफल हो सकता है लेकिन दूसरे क्षेत्र में असफल साबित हो ...

महिलाएँ मनोविज्ञान व व्यवहार परीक्षण सम्बंधित क्षेत्रों में निपुण क्यों?

Image
                    प्रायः महिलाओं के बारें में अक्सर यह कहा जाता है कि इनको शायद ही कोई समझ पाया हो। बड़े-बड़े ऋषि-मुनि, ज्ञानी व विद्वान लोग महिलाओं को समझने में असफल रहें हैं व इनके मन की गहराई को मापना किसी भी पुरुष की सीमाओं से परे है। महिलाएं किसी भी रहस्य को काफी समय तक बड़ी आसानी से दबाएं रख सकती है। लेकिन ऐसा क्यों हैं? इसी का वैज्ञानिक कारण खोजने का हम प्रयास करेंगें। समग्र रूप से, महिलाएं पुरुषों की अपेक्षा कहीं अधिक ग्रहणक्षम होती हैं, और उनकी इस विशेषता को सामान्य रूप से 'महिलाओं की अंतर्दृष्टि' के रूप में सन्दर्भित किया जाता है। महिलाओं में सांकेतिक प्रतीकों को पहचान कर उनका अर्थ समझने तथा सूक्ष्म सूचनाओं को भी ग्रहण करने की सहज क्षमता होती है। इसलिए कुछ ही पति अपनी पत्नियों से झूठ बोलकर बच पाने में सक्षम होते हैं, और इसके ठीक विपरीत ,महिलाएं पुरुषों को आसानी से चकमा दे जाती हैं तथा उन्हें कदाचित ही इस बात का पता चलता है।             अधिकांश महिलाओं के मस्तिष्क की बनावट उन्हें संसार के क...