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प्रतिज्ञा

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मुंशी प्रेमचंद द्वारा लिखी गई किताब प्रतिज्ञा का सार तत्व समाज में विधवा महिलाओं की दयनीय स्थिति के इर्द- गिर्द है। इस कहानी के मुख्य पात्र अमृतराय, दाननाथ, प्रेमा, पूर्णा, कमला प्रसाद व उसके पत्नी सावित्री है। प्रेम की चिकनी चुपड़ी बातें बनाकर लड़कियों को कैसे बेवकूफ बनाया जाता है, यह कमलाप्रसाद के जरिए और लड़कियां बेवकूफ कैसे बनती हैं, यह पूर्णा के जरिए प्रेमचंद ने इस उपन्यास में अच्छे से बताया है। इस किताब की सबसे शानदार किरदार प्रेमा या पूर्णा नही बल्कि कमलाप्रसाद की पत्नी सावित्री है। अपने पति की कुरीतियों का वह डटकर मुकाबला करती है और समानता के अधिकार की मांग रखती है। कमलाप्रसाद जैसे व्यक्ति का मुकाबला सावित्री जैसी स्त्री ही कर सकती है।  पूर्णा जैसी औरतों को तो ये समाज निगलने को तैयार बैठा रहता है। वो तो शुक्र है अमृतराय का कि उसने विधवा आश्रम खोल दिया नही तो पूर्णा का जलसमाधि लेना तय था। मैं तो यह पहले से ही सोच कर बैठा था कि ये तो मरनी निश्चित है। लेकिन प्रेमचंद को विधवा आश्रम की उपयोगिता को लेकर समाज में संदेश देना था इसलिए इस उपन्यास का अंत सुखांत रहा।

निर्मला

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निर्मला उपन्यास मुंशी प्रेमचंद के द्वारा दहेज़ प्रथा और बेमेल विवाह को केंद्र में रखकर लिखा गया उपन्यास है, जो इलाहबाद की ‘चाँद’ नामक पत्रिका में नवंबर 1925 से दिसंबर 1926 तक प्रकाशित हुआ था. इस उपन्यास में मुख्य पात्र निर्मला नाम की 15 वर्ष की युवती है, जिसका विवाह अधेड़ उम्र के और तीन बच्चों के पिता तोताराम से कर दिया जाता है. यह उपन्यास दहेज़ प्रथा, बेमेल विवाह के सामाजिक और व्यक्तिगत जीवन पर प्रभावों का चित्रण करता है.  इस उपन्यास में सभी किरदारों को बखूबी वर्णित किया गया है। निर्मला के जीवन को केंद्रित कर इस उपन्यास को लिखा गया है। निर्मला उपन्यास में ज्यादातर किरदारों को मौत हो जाती है। निर्मला का जीवन दुखों के गीत से भरा हुआ है। इतना दुख होने के बावजूद भी हिम्मत रखती है। और जीवन के जहर को पी जाती है। महिलाओं की सहिष्णुता का एक उदाहरण है निर्मला उपन्यास। मेरा मानना है कि आज कल के जमाने में ऐसी परिस्थिति प्रकट होने पर 21वीं सदी की निर्मला तलाक का रास्ता जरुर चुनती और ऐसे दुखमय जीवन से अच्छा वह अकेली जीवन यापन करती।

गबन

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ग़बन की कहानी जालपा और रमानाथ से जुड़ी है। इस कहानी में एक सुंदर, सुख चाहने वाला, घमंडी, लेकिन एक नैतिक रूप से कमजोर व्यक्ति, जो अपनी पत्नी जालपा को उसके गहने उपहार में देकर खुश करने की कोशिश करता है, जिसे वह वास्तव में अपने अल्प वेतन के साथ खरीदने का जोखिम नहीं उठा सकता है। कर्ज का एक जाल, जो अंततः उसे गबन करने के लिए मजबूर करता है। उसकी सबसे बड़ी कमजोरी ही यह है कि वह अपने मन की बात निकट से निकट व्यक्ति को भी नहीं बताता। उसकी सारी समस्याओं की जड़ यही है। गबन एक साथ कई तत्कालीन विषयों पर बहस करता है।जैसे कि मध्यवर्गीय प्रदर्शनप्रियता, स्त्रियों की आभूषणप्रियता, पुरुषों की अहं प्रवृत्ति, व्यक्ति का दुर्बल चरित्र , बेमेल विवाह, सम्मिलित परिवार में विधवा को संपत्ति का अधिकार ना होना, जाति व्यवस्था, स्वराज के लिए अपने पुत्रों को भी बलिदान कर देने की जिंदादिली, विदेशी वस्त्रों का बहिष्कार और स्वदेशी वस्तुओं का प्रयोग, सरकारी गवाह के प्रति तत्कालीन समाज का नजरिया, पुलिस प्रशासन का भ्रष्ट रूप, वेश्याओं की समाज में स्थिति। मुझे लगता है कि इस उपन्यास का नाम गबन नही बल्कि जालपा होना चाहिए था। ...

तुम पहले क्यों नहीं आए

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किताबें खरीदने के पीछे कई कारण छिपे होते हैं। किसी किताब का नाम हमें अपनी ओर खींच लेता है तो किसी का कवर। किसी किताब का लेखक हमे प्रिय लगता है तो किसी किताब का कॉन्टेंट। लेकिन इस किताब में चारों खूबी हैं। इसका लेखक, कॉन्टेंट, कवर और नाम; सभी बेहतरीन हैं। पुस्तक में बारह सच्ची कहानियाँ हैं जिनसे बच्चों की दासता और उत्पीड़न के अलग-अलग प्रकारों और विभिन्न इलाक़ों तथा काम-धंधों में होने वाले शोषण के तौर-तरीक़ों को समझा जा सकता है। जैसे; पत्थर व अभ्रक की खदानें, ईंट-भट्ठे, क़ालीन कारख़ाने, सर्कस, खेतिहर मज़दूरी, जबरिया भिखमंगी, बाल विवाह, दुर्व्यापार (ट्रैफ़िकिंग), यौन उत्पीड़न, घरेलू बाल मज़दूरी और नरबलि आदि। हमारे समाज के अँधेरे कोनों पर रोशनी डालती ये कहानियाँ एक तरफ हमें उन खतरों से आगाह करती है जिनसे भारत समेत दुनियाभर में लाखों बच्चे आज भी जूझ रहे हैं।  आंसू आ जाते हैं उस बच्चे के बारे में पढ़ते हुए जिसे उसके ही मां - बाप उसे नरबलि के लिए एक तांत्रिक को सौंप देते हैं क्योंकि कोई मूर्ख उन्हे यह बता देता है कि यह बच्चा उनके घर के लिए अपशकुनी है। ह्रदय को गहरे तल पर जाकर झकझोरने का क...

अवचेतन मन की शक्ति

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The Secret और यह किताब, दोनों इस बात पर जोर देती हैं, कि जो भी तुम पाना चाहते हो उस पर विश्वास रखो, उसके बारे में हर पल सोचो, विश्वास रखने से ही सब मिलेगा।  लेकिन सारे धर्म भी तो ईश्वर के ऊपर विश्वास पर टिके हैं, धर्म को मानने वाला तो सबसे बड़ा विश्वासी होता है। वह अपनी हर समस्या और दुख का निवारण ईश्वर की अनुकम्पा पर छोड़ देता है। अगर इनमे लिखा सच होता तो पूरी दुनिया ही खुशहाल होती, किसी को कोई दुख होता ही नही, सबको सब मिल जाता। इस किताब का लेखक एक पादरी भी था और इसका प्रभाव किताब में भी देखने को मिलता है। किताब में बीच-बीच में बाइबल में कही बातें लिखी हैं। Prayer पर बहुत जोर दिया गया है। इस बुक को पढ़कर लगता है कि लेखक ने अप्रत्यक्ष रूप से ईसाई धर्म को प्रमोट करने की कोशिश की है। मैंने ग्रेजुएशन में The Secret पढ़ी थी। इसे पढ़कर मुझे भी ऐसा ही लगा था कि ऐसा सच में होता होगा। तब यह किताब बहुत क्रांतिकारी लगी थी। लेकिन आखिर तक आते-आते यह बुक भी कर्म पर जोर देने लगती है। इसका मानना है कि पहले सोचो, फिर विश्वास करो और जब विश्वास मन में बैठ जाएगा और उसी के बारे में दिन-रात सोचोगे तो फ...